
स्कूल मे छुटी हो गई थी और मे अपना सामान उठाकर क्लास से बहार नीकला और बस की और चल दिया. बस मे पहुचकर बाकी विद्यार्थीयो का इंतजार किया. कुछ ही देर मे वो भी आ गए.
और चालु हुई हमारी बस. बस का माहोल शांत था. इतने मे आ आ छिपकली छिपकली की आवाज आई. मेने झट से उठकर पिछे की ओर देखा तो पिछे बेठे सब लोग खडे होकर आगे आ गए थे. छिपकली से जो डरते थे. मेने सोचा उत्कर्ष तेरी तो मूराद पूरी हो गई. मेने सबसे कहा कि वे आगे आ जाएँ. और फिर मे पीछे जाकर मजे से सो गया. नीद जो आ रही थी.