मेरी दुनियाँ

छोटी छोटी बातें – उत्कर्ष की

खुद क्या चला रहे हो? September 15, 2007

Filed under: बस यूं ही — उत्कर्ष बेंगाणी @ 7:14 am

शाम थी, पापा और चाचु घर पर आ गए थे। आकर अचानक से पापा ने कहा, देश में बहुत परदुषण फैल गया है। हम सब को साईकल चलानी चाहिए क्योंकि उससे परदुषण नहीं फैलता और आदमी की एकसरसाइज भी हो जाती है। मैने सोचा वाह, पापा खुद कार चलाते है और हमको साईकल चलाने को कहते है।

 

5 Responses to “खुद क्या चला रहे हो?”

  1. Amit Says:

    हा हा हा, सही पूछा। अपने पापा से नहीं पूछा ये सवाल? क्या जवाब दिया उन्होंने? ;)

  2. हाँ जी, पापा से पूछो वे खुद क्यों नहीं चलाते साइकिल। :)

  3. पापा से पूछो??

  4. हम बड़े लोग ऐसे ही अजीब नमूने होते हैं अपने लिए अलग नियम और बच्चों के लिए अलग नियम, पापा को भी एक सायकिल दिला दो

  5. rajeev jain Says:

    जायज है उत्‍कर्ष तुम्‍हारा सवाल।
    पापा को भी साइकिल दिला दो
    बोलना आफिस भले ही कार से जाएं, पर साइकिल भी चलाएं


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