hello, मुझे भुले तो नही। मेरा नाम उत्कर्ष है। यार ये वाकपेय बड़े अजीब है। बारबार बोलते रहेते है ये अच्छी बात नही। मुजे लगता है एसा बोलना अच्छी बात नही।
पापा ने मुझे कहा सब मुझे याद करते है। मैं वापस आ गया हू। अब आपका याद करना खतम हुआ। मैं इतने दिनो पढ़ाई में बिजि था। होमवरक कितना देते है मैं थक जाता हू करकर के। उमीद करता हू आप मुझे उत्तर देंगे।
धनीयवाद।
अब छुट्टी मे क्या करने का इरादा है, शैतानी या फ़िर कम्पयूतर गेम्स
वाह, बेटा, खुब मेहनत से पढ़ रहे थे इतना दिन, अब फाईनल एक्जाम कब से है?
अच्छा लगा आपको देखकर फिर से. शाबाश..
अभिवादन उत्कर्ष!
अच्छा लगा पुनः अपका संदेश पढ़कर। आगे भी लिखते रहें।
हम भूले नहीं हैं! याद है! लिखने में कजूसी मत किया करो!
Apse mil kar yahan badi khushi huyi, main apki tarah abhi devnagari me sandesh bhejane me ustaad nahi ho saka hun… mera roman me hee swagat sweekar karo.
तुम्हारी मासूमियत शायद हीं भूलने दे किसी को मैं पहली द्फा यहाँ आया हूँ पर ur cute writeups पड़कर मजा आया…लिखते रहो॥
हाई, कितने दिन बाद लिखा। आपकी एंजेलिना वाली पोस्ट पढ़ी थी काफी पहले, याद थे आप। अब लिखते रहना। कम से कम हफ्ते मैं एक बार के लिए तो समय निकाल ही सकते हो।
‘वाकपेय’ बोले तो क्या मतलब ?