इसी साल मै पांचवी मै आया हुँ। उसके चार-पाँच दिन बाद एक लडकी आइ । मुझे लगा कि वह मेरी दोस्त बन सकती है। पर कुछ दिन बाद वह मुझे अच्छी नही लगी क्योंकी वह गाली बहुत देती है। वैसे हम लोग स्कूल मै बहुत मजा करते है।लडकीयाँ तो लडकीयाँ जब शीक्षक नही आते तो इधर-उधर भागने लगते है। मै ऐक रेणकर हूँ। मुझे हिन्दी बहुत पस्नदहै। मै उमीद करता हुँ की मेरा अगला साल अच्छा हो।
अलवीदा
उत्कर्ष
अले..ये कौन सी लड़की है जो गाली देती है? कौन हो भाई आप अपने बारे में भी तो लिखो.. क्या करते हो. कित्ते साल के हो. कौन है माता पिता? और कहां पढ़ते हो.. बोले तो स्कूल कौन सा है.. इत्यादि.
आपकी हिन्दी सचमुच बहुत अच्छी है ॰॰॰
पांचवीं कक्षा में तो हम ठीक से बोल भी नहीं पाते थे और आप लिख रहे हो ॰॰॰
साधुवाद!!!
उत्कर्ष…….???
नाम सुना हुआ लगता है, शायद एक बार पंकज या संजय भाई के चिट्ठे पर कहीं पढ़ा था, कहीं छोटे संजय तो नहीं?
अगर आप उत्कर्ष बेंगानी ही हो तो कहना पड़ेगा कि पूत के पाँव पालने में ही दिखने लगे हैं।
કાં પછી એમ પણ કહી શકાય કે ” મોર ના ઈંડા ચિતરવા ના પડે”
आपके ब्लोग को पढ़ना मुश्किल है - काले पर लाला। क्या रंग कोई और नहीं हो सकते।
‘लगे रहो मुन्ना भाई’लेकिन सिर्फ़ ब्लाग तक ,अभी लडकियो से दूर ही रहना अगर न विशवास हो तो पापा से पूछ लेना।
बहुत अच्छे। हिन्दी काफी अच्छी लिखी है।तुम्हे और तुम्हारे माता पिता को बधाई।
वाह, बेटा, इतनी जल्दी हिन्दी मे टाईप करना भी सीख गये, बहुत अच्छा लगा देख कर. ऎसे ही आगे बढते चलो और खुब नाम कमाओ.
ढेरों शुभकामनाओं के साथ…
लगे रहो। बडे की बाते बहुत नही सुनते। पापा से कहकर लडकियो की फोटो खिंचने के लिये केमेरा वाला फोन मांगो।
अबे मज़ाक कर रिया हुं। अपने पापा से मत कहना की मैने एसा कहा है, अपनी प्राइवेट बाते है ये! समज गया ना?
वेसे तुम्हारे पापा से ज्यादा कोमेंट मिली है। बेचारे तुम्हारे पापा!!
बहुत खूब यार..
मजे आ गये पढकर आपका ब्लोग.. लिखते रहें हम भी पढते रहेंगे..
वाह उत्कर्ष!
उत्कृष्ट प्रयास। हिंदी का भविष्य
स्वर्णिम है।
शुभाशीष।
उतकर्ष लगे रहो !
शुभकामनाओ के साथ